जलवायु परिवर्तन अनुकूलन परियोजना

कृषि पर निर्भर ग्रामीण समुदायों की सतत आजीविका राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कोष (NAFCC) के अंतर्गत

पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन विभाग हिमाचल प्रदेश सरकार

मुख्य फोकस

परियोजना का उद्देश्य जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों, सामाजिक सहभागिता (सोशल इंजीनियरिंग) और क्षमता-विकास प्रक्रियाओं को अपनाकर ग्रामीण सीमांत किसानों, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं की अनुकूलन क्षमता (एडेप्टिव कैपेसिटी) को मजबूत करना है।

परियोजना का सारांश

हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधन, पारिस्थितिकी तंत्र और ग्रामीण आजीविका गंभीर खतरे में हैं। सिरमौर जिला बार-बार पड़ने वाले सूखे और जल-संकट की वजह से विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है। राष्ट्रीय अनुकूलन कोष , पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से, राज्य के पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक दीर्घकालिक कार्यक्रम लागू किया।इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्लाइमेट स्मार्ट खेती तथा सामाजिक हस्तक्षेप को बढ़ावा देना था, जिससे छोटे और सीमांत किसानों विशेषकर ग्रामीण महिलाओं की जलवायु जोखिमों के प्रति संवेदनशीलता कम की जा सके और उनकी जलवायु अनुकूलन क्षमता  को मजबूत किया जा सके।

उपलब्धि के लक्ष्य