मुख्य फोकस
परियोजना का उद्देश्य जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों, सामाजिक सहभागिता (सोशल इंजीनियरिंग) और क्षमता-विकास प्रक्रियाओं को अपनाकर ग्रामीण सीमांत किसानों, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं की अनुकूलन क्षमता (एडेप्टिव कैपेसिटी) को मजबूत करना है।
परियोजना का सारांश
हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधन, पारिस्थितिकी तंत्र और ग्रामीण आजीविका गंभीर खतरे में हैं। सिरमौर जिला बार-बार पड़ने वाले सूखे और जल-संकट की वजह से विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है। राष्ट्रीय अनुकूलन कोष , पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से, राज्य के पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक दीर्घकालिक कार्यक्रम लागू किया।इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्लाइमेट स्मार्ट खेती तथा सामाजिक हस्तक्षेप को बढ़ावा देना था, जिससे छोटे और सीमांत किसानों विशेषकर ग्रामीण महिलाओं की जलवायु जोखिमों के प्रति संवेदनशीलता कम की जा सके और उनकी जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत किया जा सके।
उपलब्धि के लक्ष्य
- जलवायु परिवर्तन संवेदनशीलता का इंडेक्सिंग, मैपिंग और अनुकूलन योजनाएँ तैयार करना।
- कम से कम 30,000 किसानों द्वारा सूखा अनुकूलन हेतु क्लाइमेट स्मार्ट कृषि पैकेज अपनाए जाएँ।
- लक्षित लाभार्थियों में से 75% द्वारा अनुशंसित कृषि तकनीकों/प्रथाओं के पैकेज को अपनाना।
- मृदा-जल संरक्षण उपायों और सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो-इरिगेशन) प्रणालियों के माध्यम से कम से कम 26% तक जल सुरक्षा में वृद्धि।
- 1 या 2 किसान उत्पादक संगठन अपना व्यवसाय शुरू करें।
- 1500 प्रगतिशील किसान क्लाइमेट स्मार्ट तकनीक अपनाएँ और सामुदायिक स्तर के संसाधन व्यक्ति बनें।
- 700 कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, जिनमें विभिन्न हितधारकों में से 30,000 प्रतिभागी शामिल हों।
- कम से कम 20,000 किसानों को वित्तीय समावेशन कार्यक्रम में शामिल किया जाए और कम से कम 15,000 किसानों को मौसम बीमा कार्यक्रम के लाभार्थी के रूप में लक्षित किया जाए।